त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ और मंदिर ट्रस्ट का दो महीने की बंदी का विरोध; महाजन ने ध्वजस्तंभ बोधचिह्न विवाद को साज़िश बताया
त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष और UNI के अनुसार मंदिर ट्रस्ट ने भी मंदिर को दो महीने बंद रखने का विरोध किया है; उनका कहना है कि भीड़ प्रबंधन के साथ काम चल सकता है। मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार ध्वजस्तंभ के बोधचिह्न पर उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली और कुंभ को बदनाम करने की साज़िश है। बंदी का कोई आदेश प्रकाशित नहीं हुआ है।
लेखक: The Nashik Kumbh Desk
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पहली घोषणा:

15 अक्टूबर से 15 दिसंबर 2026 तक कुंभ के कामों के लिए त्र्यंबकेश्वर मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए बंद रखने के प्रस्ताव का अब खुला विरोध हो रहा है। 17 अक्टूबर तक बंदी का कोई आदेश प्रकाशित नहीं हुआ है। हमारी पिछली पोस्ट: ध्वजस्तंभ पूजन संपन्न; मंदिर बंदी पर फैसला नहीं।
16 अक्टूबर को क्या कहा गया
- त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे ने सकाल से कहा कि मंदिर बंद कर श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित रखना उचित नहीं है। उनके अनुसार गाँव की अर्थव्यवस्था मंदिर पर निर्भर है, और आवाजाही, समय और भीड़ का नियमन हो तो बंदी की ज़रूरत नहीं। उन्होंने कहा कि प्रशासन दर्शन रोके बिना काम कराने के लिए पुरोहित संघ और देवस्थान ट्रस्ट को ज़रूरी मनुष्यबल और सहयोग दे। यह बयान सकाल में नाम के साथ ऑन-रिकॉर्ड है।
- UNI के अनुसार मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय पुरोहित संघ दोनों चाहते हैं कि कामों के साथ रोज़ दर्शन जारी रहें, और ट्रस्ट ने कड़ी सुरक्षा व अतिरिक्त कर्मचारी तैनात करने का सुझाव दिया है। UNI के मुताबिक कुंभ मेला प्राधिकरण ने बंदी का प्रस्ताव "कथित तौर पर" रखा। ट्रस्ट की राय UNI की रिपोर्ट पर आधारित है; ट्रस्ट का अपना बयान हमें नहीं मिला।
- महाराष्ट्र टाइम्स ने 9 अक्टूबर को लिखा था कि ठेकेदार दर्शन पथ और प्रांगण के काम आगे बढ़ाने के लिए बंदी चाहते हैं और सरकार इस पर विचार कर रही है।
ध्वजस्तंभ बोधचिह्न विवाद
सकाल के अनुसार कुशावर्त के ध्वजस्तंभ पर पुरोहित संघ के बोधचिह्न को लेकर नया विवाद उठा है। थेटे ने कहा कि ध्वजस्तंभ और सिंहस्थ पताका अलग विषय हैं, संघ ने इसी वर्ष अपना बोधचिह्न पंजीकृत कराया है, और स्तंभ पर महाराष्ट्र शासन का बोधचिह्न भी है। उन्होंने कहा कि मूल पताका के पारंपरिक प्रतीक नहीं बदले गए हैं।
कुंभ मंत्री गिरीश महाजन ने, सकाल के हवाले से, कहा कि बोधचिह्न पर उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली, पूजन परंपरा के अनुसार हुआ, और कुंभ को बदनाम करने की साज़िश रची जा रही है। यह उनका ऑन-रिकॉर्ड बयान है; हमने किसी तरफ़ का कोई सबूत या शिकायत नहीं देखी। महाजन ने यह भी कहा कि 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण के लिए सभी 13 अखाड़ों को आमंत्रित किया जाएगा।
अभी स्थिति
- मंदिर बंदी: सिर्फ़ प्रस्ताव; पुरोहित संघ (ऑन-रिकॉर्ड) और कथित तौर पर ट्रस्ट विरोध में। कोई आधिकारिक फैसला नहीं।
- ध्वजस्तंभ बोधचिह्न: उपरोक्त पक्षों के बीच विवाद; कोई आधिकारिक कार्रवाई सामने नहीं आई।
- 31 अक्टूबर, दोपहर 12:02 बजे ध्वजारोहण: अपरिवर्तित।
त्र्यंबकेश्वर जाने से पहले मंदिर ट्रस्ट की सूचनाएँ देख लें। संबंधित: कुंभ स्थिति बोर्ड, कुंभ तिथियाँ।


