रामकुंड घाट का काम: याचिकाकर्ता का आरोप, नदी पात्र में सीढ़ियाँ और कंक्रीट 2018 के हाईकोर्ट आदेश का उल्लंघन; मनपा ने कहा, सिर्फ़ पुराने घाटों की मरम्मत; सुनवाई 27 अक्टूबर को
बीबीसी न्यूज़ मराठी के अनुसार याचिकाकर्ता राजेश पंडित का कहना है कि दुतोंड्या मारुति के पास गोदावरी के पात्र के अंदर बने घाट व सीढ़ियाँ और गांधी तालाब में कंक्रीट का काम 18 दिसंबर 2018 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ है, जो नदी पात्र में निर्माण पर रोक लगाता है। नदी विशेषज्ञ डॉ. प्राजक्ता बस्ते कहती हैं कि पात्र पर कंक्रीट से प्राकृतिक झरे बंद होते हैं और तकनीकी अध्ययन ज़रूरी है। मनपा आयुक्त मनीषा खत्री का कहना है कि सिर्फ़ पुराने, टूटे घाटों की मरम्मत हो रही है, नदी पात्र में निर्माण नहीं। गोदावरी प्रदूषण मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को है।
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लेखक: The Nashik Kumbh Desk
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पहली घोषणा:

22 अक्टूबर को हमने बताया था कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाशिक महानगरपालिका को दो हफ़्ते दिए हैं ताकि वह गोदावरी प्रदूषण पर अपने कदम बताए, और अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को है। अब बीबीसी न्यूज़ मराठी (24 अक्टूबर) ने रामकुंड पर ही कुंभ के कामों को लेकर नए विवाद की ख़बर दी है। नीचे की सारी बातें रिपोर्ट हैं: ये आरोप और जवाब हैं, और किसी अदालत ने इन पर फ़ैसला नहीं दिया है।
आरोप (रिपोर्ट)
गोदावरी पुनरुज्जीवन के लिए 2012 में जनहित याचिका दायर करने वाले कार्यकर्ता राजेश पंडित ने बीबीसी से कहा कि:
- दुतोंड्या मारुति के पास घाट और सीढ़ियाँ नदी पात्र के अंदर बनाई गई हैं, और गांधी तालाब में पात्र का बड़ा हिस्सा कंक्रीट से ढका है। बीबीसी ने वहाँ कंक्रीट के नीचे से एक झरा निकलते देखा; कुंड सूखा होने से श्रद्धालु उसी से स्नान कर रहे थे।
- यह 18 दिसंबर 2018 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ है, जो उनके अनुसार धार्मिक कारणों से भी नदी पात्र या ब्लू फ्लड लाइन में कोई अस्थायी या स्थायी निर्माण करने से रोकता है।
- नदी पात्र के प्राकृतिक झरे (जीवंत झरे) कंक्रीट से ढके जा रहे हैं।
- बीबीसी के अनुसार उनके 17 अक्टूबर के आवेदन के बाद विभागीय आयुक्त कार्यालय ने संबंधित एजेंसियों से कार्रवाई कर रिपोर्ट देने और अदालत की अवमानना से बचने को कहा। पत्र में काम रोकने का स्पष्ट आदेश नहीं है।
विशेषज्ञ की राय (रिपोर्ट)
2014 से काम कर रही गोदावरी संवर्धन समिति की विशेषज्ञ सलाहकार डॉ. प्राजक्ता बस्ते ने बीबीसी से कहा कि कंक्रीट के कारण झरों का नदी से संपर्क टूट रहा है। उनके अनुसार पुराने घाट और कुंड प्राकृतिक काले पत्थर से, पात्र को ज़्यादा बदले बिना बने थे, और नए काम में भी यही होना चाहिए। मौजूदा काम का झरों पर कितना असर हुआ, यह जानने के लिए तकनीकी अध्ययन ज़रूरी है।
मनपा का जवाब (रिपोर्ट)
मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने बीबीसी से कहा कि यह काम टूटे या खोखले हो चुके पुराने घाटों की मरम्मत और पुनर्स्थापना है, और बड़े पैमाने पर नया निर्माण नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "हम नदी पात्र में काम नहीं कर रहे हैं।"
आगे क्या
- हाईकोर्ट के 13 अक्टूबर के आदेश में मनपा से दो हफ़्ते में प्रदूषण पर कदम बताने को कहा गया था। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को अपेक्षित है। बीबीसी की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि पंडित उस सुनवाई में घाट के काम का मुद्दा उठाएँगे या नहीं।
- ये काम 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण से कुछ दिन पहले रामकुंड क्षेत्र में हो रहे हैं। रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं है जिससे लगे कि समारोह पर असर होगा।
- 27 अक्टूबर को अदालत जो कहेगी, हम बताएँगे।
श्रद्धालुओं के लिए क्यों अहम
ज़्यादातर लोग रामकुंड और उसके आसपास के घाटों पर ही स्नान करते हैं। गोदावरी के पानी की गुणवत्ता और घाटों की हालत एक ही अदालती मामले का हिस्सा हैं। स्नान स्थलों के लिए हमारा घाट पेज देखें। ध्वजारोहण के लिए ध्वजारोहण 2026 हब देखें।


