दशहरा 2026: पंचवटी की रामकथा, आज का रावण दहन और सिंहस्थ कुंभ 2027 के लिए इसका अर्थ
आज, मंगलवार 20 अक्टूबर को विजयादशमी है। रामतीर्थ-गंगाघाट पर रामलीला और रावण दहन होगा, इसके लिए दोपहर 3 से रात 10 बजे तक मालेगाव स्टैंड से गाडगे महाराज पुल का रास्ता बंद रहेगा। पंचवटी, कालाराम मंदिर, सीता गुफा, तपोवन और रामकुंड की रामकथा, और 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण से इनका रिश्ता।
लेखक: The Nashik Kumbh Desk
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आज मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी (दशहरा) है। केंद्र सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची में यही तारीख है। पूरे देश में रावण दहन होगा, पर नाशिक के लिए यह पर्व खास है: रामायण की पंचवटी यहीं है, और ग्यारह दिन बाद, 31 अक्टूबर को, इसी गोदावरी तट पर सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण होगा।
नाशिक में आज क्या है (CONFIRMED)
- रावण दहन, रामतीर्थ-गंगाघाट: रामतीर्थ गंगाघाट पार्किंग मैदान पर रामलीला और रावण दहन होगा। उससे पहले चतुःसंप्रदाय अखाड़े से श्रीराम-लक्ष्मण सेना की शोभायात्रा निकलेगी। रास्ता: मालेगाव स्टैंड, पंचवटी कारंजा, मालवीय चौक, शिवाजी चौक, सीता गुफा रोड, श्री कालाराम मंदिर, सरदार चौक, साईबाबा मंदिर होते हुए रामतीर्थ। (सकाळ, महाराष्ट्र टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया)
- ट्रैफिक बदलाव: दोपहर 3 से रात 10 बजे तक मालेगाव स्टैंड से रामकुंड, सरदार चौक, गाडगे महाराज पुल (और उल्टी दिशा में) सभी वाहनों का प्रवेश बंद। वैकल्पिक रास्ता: मालेगाव स्टैंड – पंचवटी कारंजा – निमाणी बस स्टैंड – काट्या मारुति चौक – गणेशवाडी। पुलिस, एम्बुलेंस, दमकल को छूट। पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) चंद्रकांत गवली ने नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। नवरात्रि की देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी रामतीर्थ पर होता है, इसलिए भीड़ ज़्यादा रहेगी।
- गांधीनगर, नाशिक रोड (REPORTED): रामलीला समिति की ओर से रामलीला मैदान पर 65 फुट के रावण का दहन; यह परंपरा का 71वाँ साल है और आयोजकों को 30 हज़ार से ज़्यादा लोगों की उम्मीद है। (फ्री प्रेस जर्नल)
- मुहूर्त (REPORTED): एनडीटीवी के अनुसार दशमी तिथि आज दोपहर 12:50 से है और प्रदोष काल शाम 5:47 से। स्थानीय पंचांग में अंतर हो सकता है।
रामकुंड क्षेत्र में ध्वजारोहण के कामों की वजह से अभी चरणों में प्रवेश सीमित है (रामकुंड बंदी की खबर)। घाट जाने से पहले घाटों की ताज़ा जानकारी देख लें।
पंचवटी की रामकथा (परंपरा)
नीचे की बातें धार्मिक परंपरा और रामायण कथा पर आधारित हैं, ऐतिहासिक रिकॉर्ड के रूप में नहीं।
- पंचवटी: मान्यता है कि वनवास के दौरान प्रभु राम, सीता और लक्ष्मण गोदावरी किनारे पाँच वटवृक्षों वाले इसी क्षेत्र में रहे। "पंच-वटी" नाम इसी से है।
- तपोवन और "नाशिक" नाम: परंपरा के अनुसार तपोवन में लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक (संस्कृत में *नासिका*) काटी थी, और इसी से नगर का नाम "नासिक" पड़ा। इसी प्रसंग से आगे सीता हरण और रावण से युद्ध होता है, यानी दशहरे की कहानी एक तरह से नाशिक से ही शुरू होती है।
- सीता गुफा: पंचवटी की यह संकरी गुफा। मान्यता है कि माता सीता यहाँ रहीं और इसी क्षेत्र से रावण ने उनका हरण किया। अंदर झुककर जाना पड़ता है; बुज़ुर्ग सावधानी रखें।
- कालाराम मंदिर: काले पत्थर की राम-लक्ष्मण-सीता मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध, अठारहवीं सदी के अंत में बना मंदिर। 1930 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का मंदिर प्रवेश सत्याग्रह इसी मंदिर के लिए हुआ था। आज की शोभायात्रा इसी मंदिर के सामने से गुज़रती है।
- रामकुंड: परंपरा है कि प्रभु राम ने यहाँ स्नान किया। इसीलिए सिंहस्थ में नाशिक का अमृत स्नान रामकुंड पर होता है।
कुंभ 2027 के श्रद्धालुओं के लिए इसका मतलब
- ध्वजारोहण, 31 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:02: रामकुंड (नाशिक) और कुशावर्त (त्र्यंबकेश्वर) पर एक साथ। यह NTKMA की आधिकारिक योजना में है (ध्वजारोहण कार्यक्रम)।
- अमृत स्नान: 2 अगस्त 2027 (पहला), 31 अगस्त 2027 (दूसरा), और तीसरा नाशिक में 11 सितंबर व त्र्यंबकेश्वर में 12 सितंबर 2027। सभी तिथियाँ तारीखों के पेज पर।
- दर्शन का क्रम: ज़्यादातर श्रद्धालु रामकुंड स्नान, कालाराम दर्शन, सीता गुफा और फिर तपोवन, इस तरह पंचवटी घूमते हैं। ये जगहें पैदल दूरी पर हैं (तपोवन थोड़ा दूर)। कुंभ के दौरान भीड़ और ट्रैफिक नियंत्रण रहेगा, तब आधिकारिक सूचना देखें।
दशहरा साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है, इसलिए कई परिवार इसी दिन रिश्ते की तलाश भी शुरू करते हैं; शादी का बायोडाटा बायोडाटाजी पर बनाया जा सकता है।
आप सभी को दशहरे की शुभकामनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में दशहरा कब है?
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026। केंद्र सरकार की 2026 की छुट्टियों की सूची में विजयादशमी इसी दिन है।
आज नाशिक में रावण दहन कहाँ है?
पंचवटी में रामतीर्थ-गंगाघाट पार्किंग मैदान पर, और नाशिक रोड के गांधीनगर रामलीला मैदान पर। पंचवटी में दोपहर 3 से रात 10 बजे तक मालेगाव स्टैंड से गाडगे महाराज पुल का रास्ता बंद है।
नाशिक नाम कैसे पड़ा?
परंपरा के अनुसार तपोवन में लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक (नासिका) काटी थी, इसी से 'नासिक' नाम पड़ा, ऐसा कहा जाता है। यह धार्मिक मान्यता है।
सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण कब है?
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:02 बजे रामकुंड और कुशावर्त पर एक साथ।

