ध्वजारोहण के लिए बाँध से पानी नहीं: कलेक्टर ने साफ किया, रामकुंड फिलहाल सूखा ही

नाशिक के कलेक्टर आयुष प्रसाद ने कहा है कि 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण समेत किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के लिए बाँध से पानी नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि शासन निर्णय इसकी इजाज़त नहीं देता। यह सकाळ की उस खबर से उलट है जिसमें गंगापुर से पानी छोड़कर रामतीर्थ भरने की बात थी। कुंभ आयुक्त शेखर सिंह का कहना है कि जलसंपदा विभाग के साथ बैठक में अंतिम फैसला होगा।

लेखक: The Nashik Kumbh Desk

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मीडिया रिपोर्टमीडिया रिपोर्ट पर आधारित। आधिकारिक पुष्टि तक ब्योरे बदल सकते हैं।

पहली घोषणा:

Simhastha Kumbh Mela works at Ramkund Ganga Ghat in Nashik
Simhastha Kumbh Mela works at Ramkund Ganga Ghat, Nashik (22 May 2026).Photo: “Ramkund Nashik Dry Riverbed Kumbh Mela Works 22 May 2026 Photos 7.jpg” by Rohit R Nashik, via Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

18 अक्टूबर की हमारी खबर का अपडेट: रामतीर्थ भरने के लिए गंगापुर से पानी छोड़ने की तैयारी। वह खबर सकाळ की रिपोर्ट पर आधारित थी, जिसके मुताबिक ध्वजारोहण से पहले गंगापुर बाँध समूह से आवर्तन छोड़कर रामतीर्थ का सूखा पात्र भरा जाना था। अब जिला प्रशासन ने कहा है कि इस काम के लिए बाँध का पानी नहीं छोड़ा जा सकता।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने 19 अक्टूबर 2026 को खबर दी कि नाशिक जिला प्रशासन ने किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के लिए, जिसमें शनिवार 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे होने वाला ध्वजारोहण भी शामिल है, बाँध से पानी छोड़ने से इनकार कर दिया है। कलेक्टर का यह रुख आधिकारिक तौर पर सामने आया है। रामकुंड के पानी पर आखिरी फैसला जलसंपदा विभाग के साथ होने वाली बैठक पर टिका है।

अधिकारियों ने क्या कहा

  • कलेक्टर आयुष प्रसाद ने साफ कहा कि कुंभ मेला प्राधिकरण (NTKMA) की ओर से ऐसी कोई माँग उनके पास नहीं आई है, और शासन निर्णय इस काम के लिए पानी छोड़ने की अनुमति नहीं देता, इसलिए पानी नहीं छोड़ा जा सकता।
  • कुंभ आयुक्त शेखर सिंह ने रविवार (18 अक्टूबर) को पत्रकारों से कहा कि सूखे को देखते हुए जल्द ही जलसंपदा विभाग के साथ बैठक होगी, जिसमें स्थिति देखकर फैसला लिया जाएगा।
  • यह मुद्दा कुंभ मंत्री गिरीश महाजन की अध्यक्षता में हुई 16 अक्टूबर की NTKMA बैठक में उठा था। बैठक में गोदावरी में मिल रहे सीवेज, सूखे रामकुंड और अरुणा–गोदावरी संगम पर घटे पानी पर बात हुई, जिसकी बड़ी वजह निर्माण कार्य हैं।
  • NTKMA के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार NMC से कहा गया है कि गोदावरी में गंदा पानी न जाने दे और जमा पानी हटाए। इन जगहों पर कम से कम दो फुट पानी बनाए रखने की ज़रूरत पर भी चर्चा हुई, पर इस पर कोई फैसला घोषित नहीं हुआ है।

बाँध भरे हैं, फिर भी सूखे का नियम क्यों

TOI में दिए गए ज़िले के आँकड़ों के मुताबिक जलाशयों में 67 TMC, यानी करीब 95% पानी है (पिछले साल इसी समय 92.5%), और गंगापुर समूह में 9.9 TMC, यानी 96.5% (पिछले साल 98.8%)। अधिकारियों का कहना है कि सूखा बाँधों के भंडार से नहीं, बल्कि असमान बारिश और गिरते भूजल से तय होता है। नाशिक ज़िला सूखाग्रस्त है, पर नाशिक तालुका नहीं, जबकि नीचे की ओर निफाड सूखाग्रस्त है। BBC मराठी के अनुसार नाशिक के 15 में से 13 तालुकों में सूखा है।

जो खबरें मेल नहीं खातीं

  • सकाळ (17 अक्टूबर) ने लिखा था कि पालकमंत्री गिरीश महाजन ने गंगापुर से करीब 150 से 200 दशलक्ष घनफुट पानी छोड़ने की पुष्टि की है। इसका कोई आदेश कभी प्रकाशित नहीं हुआ।
  • पुढारी (19 अक्टूबर) अब भी लिख रहा है कि ध्वजारोहण के लिए गंगापुर से आवर्तन छोड़ा जाएगा और प्रशासन को उम्मीद है कि इससे पात्र का मलबा बह जाएगा।
  • BBC मराठी (19 अक्टूबर) के मुताबिक पुरोहित संघ और साधु-महंतों ने माँग की है कि ध्वजारोहण के समय नदी बहती रहे, और गंगापुर से पानी छोड़ने पर विचार चल रहा था।

जब तक जलसंपदा विभाग की बैठक में फैसला नहीं होता, पानी छोड़ने की बात को अनिश्चित ही मानें।

रामकुंड पर क्या तैयार है

पुढारी के अनुसार रामकुंड और गांधी तलाव की सफाई हो गई है, घाट की मरम्मत और समतलीकरण लगभग पूरा है, दोनों ध्वजस्तंभ खड़े हो चुके हैं और घाटों से अतिक्रमण हटाए गए हैं। लेकिन दुतोंड्या मारुति के पास वाले पुल से नीचे सूखे पात्र में कीचड़ में पड़े कपड़े, निर्माल्य और मूर्तियों की वजह से अब भी दुर्गंध आ रही है।

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