
नाशिक सिंहस्थ में 'शाही स्नान' अब 'अमृत स्नान' कहलाएगा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह सुझाव स्वीकार किया है कि शाही स्नान को अमृत स्नान कहा जाए, जैसा 2025 में प्रयागराज में अपनाया गया था।
नाशिक–त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ के तीनों शाही स्नान अब आधिकारिक रूप से अमृत स्नान कहलाएँगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह सुझाव स्वीकार कर लिया, जो 2025 के प्रयागराज कुंभ में अपनाई गई शब्दावली का अनुसरण करता है।
इसके पीछे भाषाई और सांस्कृतिक तर्क है। 'शाही' फ़ारसी मूल का शब्द है जिसका अर्थ राजसी है; 'अमृत' वह है जो समुद्र मंथन से निकला, और जिसके कारण कुंभ का अस्तित्व है। समर्थकों का तर्क है कि पुराना नाम शोभायात्रा के वैभव का वर्णन करता है, जबकि नया नाम बताता है कि जल क्या बन जाता है।
व्यवहार में दोनों नाम वर्षों तक मेले में सुनाई देंगे। अखाड़ों की परंपरा सदियों पुरानी है और किसी परिपत्र से नहीं बदलती। साइनबोर्ड, सरकारी संवाद और कार्यक्रम में अमृत स्नान प्रयुक्त होगा; कई साधु, पुरोहित और श्रद्धालु शाही स्नान कहते रहेंगे, और दोनों में कुछ ग़लत नहीं।
आगंतुकों के लिए इस परिवर्तन का कोई व्यावहारिक परिणाम नहीं है। तिथियाँ अपरिवर्तित हैं: 2 अगस्त, 31 अगस्त और 11–12 सितंबर 2027। किसी बोर्ड या समय-सारणी पर दोनों में से कोई भी शब्द दिखे, वह इन्हीं तीन सुबहों की बात कर रहा है।


